घर की मुर्गी दाल बराबर

घर की मुर्गी दाल बराबर, हम सबने न जाने कितनी बार यह किसी न किसी को कहते सुना होगा ,और आप ये सोच रहे होंगे की मैं क्या कहने जा रहा हूँ ?

तो मैं कहना चाहता हूँ कि, मैं यह लेख दामपत्य जीवन के संदर्व मैं कहने जा रहा हू।
घर की मुर्गी दाल बराबरअक्सर ऐसा होता है कि स्री और पुरुष विवाह से पूर्व अत्यधिक आकर्षित रहते है परन्तु विवाह के पस्चात दोनों की रुचि इक दूजे के प्रती धीरे धीरे कम होने लगती है, ठीक वैसे ही जैसे हमें गर, रोज़-रोज़ मुर्गी भी खाने को दी जाये, तो हमें कुछ दिन के पस्चात उनके स्वाद से भी अरूचि हो जायेंगे।
यह बिलकुल स्वाभाविक भी है पर हमें यह बात समझ लेनी चाहिए कि जब हमारे दिन अच्छे होते है तो बहुत लोग हमारे जीवन में आतें है ।
वस्तुतः हम भी उनके प्रति आकर्षित हो जाते है, पर जब हमारे बुरे दिन आते है तब सिर्फ हमारे अपने ही हमारे हाथ थामें रहतें है और बाहरी लोग साथ छोड जातें हैं।
और इससे जो आपको शक्ति मिलती है उससे आपमें दुनिआ से संघर्ष करने का हौसला मिलता हैं, जो किसी भी चमत्कार से कम नहीं।
इसलिए वस्तुतः अपने पति या पत्नी के प्रति समर्पित रहें इससे आपको आध्यात्मिक शक्ति की भी अनुभूति होगी।

10 thoughts on “घर की मुर्गी दाल बराबर”

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